श्याम पट्ट से डिजिटल शिक्षा तक का सफर
श्यामपट्ट से डिजिटल शिक्षा में परिवर्तन शिक्षा के पारंपरिक तरीकों से प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव है,जो मल्टीमीडिया, इंटरैक्टिव सामग्री और दूरस्थ शिक्षा के लिए बेहतर पहुँच प्रदान करता है, जिससे पारंपरिक कक्षा की बाधाएं दूर होती हैं और शिक्षण व सीखने के अनुभव अधिक आकर्षक और प्रभावी बनते हैं। डिजिटल शिक्षा में ऑडियो-विज़ुअल सामग्री, ऑनलाइन सामग्री और स्क्रीन-शेयरिंग जैसी वि
जे एन टी डेस्क

9:59 PM, August 28, 2025
जे एन टी डेस्क
मनोहर कुमार
शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हो रहे हैं। पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था अब अवसान की ओर जा रहे हैं। शिक्षक और शिक्षार्थी में दूरियां आ रही है।शिक्षक द्वारा परोसी गई सामग्री को शिक्षार्थी ग्रहण कर रहे हैं।सवाल जबाव दूर की बात हो गई है। स्कूल कालेज और कोचिंग के बाद डिजिटल लाइब्रेरी खूब खुल रहे हैं।जहां विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं को दिया जा रहा है।मोबाइल और लैपटॉप के जरिए छात्र नामी गिरामी शिक्षकों के सामग्री पढ़ रहे हैं।कोचिंग सेंटरों में श्याम पट्ट पर पढ़ाए जाते हैं।तो डिजिटल लाइब्रेरी में शिक्षण अपने से होता है।इस समय लाइब्रेरी सेंटरों में खूब भीड़ उमड़ रही है। जहां छात्रों को वातानुकुलित कमरे, आराम दायक कुर्सियां,मुफ्त वाई फाई,कम खर्च के किराए शामिल हैं।
श्यामपट्ट से डिजिटल शिक्षा में परिवर्तन शिक्षा के पारंपरिक तरीकों से प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव है,जो मल्टीमीडिया, इंटरैक्टिव सामग्री और दूरस्थ शिक्षा के लिए बेहतर पहुँच प्रदान करता है, जिससे पारंपरिक कक्षा की बाधाएं दूर होती हैं और शिक्षण व सीखने के अनुभव अधिक आकर्षक और प्रभावी बनते हैं। डिजिटल शिक्षा में ऑडियो-विज़ुअल सामग्री, ऑनलाइन सामग्री और स्क्रीन-शेयरिंग जैसी विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जो छात्रों की समझ और जुड़ाव को बढ़ाता है।
श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड) का श्रेय स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग स्थित ओल्ड हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक जेम्स पिलान्स को दिया जाता है, जिन्होंने 1801 में ब्लैकबोर्ड का आविष्कार किया था।प्राथमिक कक्षा से लेकर कोचिंग सेंटरों तक में ब्लैक बोर्ड पर पढ़ाई होती है।
डिजिटल लाइब्रेरी की खोज किसी एक व्यक्ति ने नहीं की, बल्कि इसका विकास कई दशकों में विभिन्न लोगों के योगदान से हुआ है, लेकिन माइकल हार्ट को प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग के संस्थापक के रूप में जाना जाता है, जो पहली डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना थी, और वेन्नेवर बुश ने 1945 में अपने विचार "मेमेक्स" से डिजिटल लाइब्रेरी के शुरुआती आधार रखे थे।
वेन्नेवर बुश ने
1945 में "जैसा हम सोच सकते हैं नामक लेख में, उन्होंने मेमेक्स नामक एक स्मृति विस्तारक की अवधारणा प्रस्तुत की थी, जो एक ऐसी मशीन थी जो जानकारी को संग्रहीत और लिंक कर सकती थी, और इसे डिजिटल लाइब्रेरी के लिए एक शुरुआती आधार माना जाता है।
जेसीआर लिक्लिडर
1965 में, उन्होंने कंप्यूटर की क्षमता का वर्णन किया था कि कैसे पारंपरिक पुस्तकालयों को स्वचालित किया जा सकता है और दूरस्थ पहुँच को सक्षम किया जा सकता है, जो डिजिटल लाइब्रेरी के विकास के लिए महत्वपूर्ण था।
माइकल हार्ट
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उन्होंने 1971 में प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग की स्थापना की, जिसने पहली डिजिटल लाइब्रेरी को संचालित किया, जिसका उद्देश्य लाखों ई-पुस्तकों को जनता के लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराना था।
टिम बर्नर्स-ली
1991 में वर्ल्ड वाइड वेब के आविष्कार के साथ, उन्होंने डिजिटल लाइब्रेरी को उनके आधुनिक रूप में आने में मदद की, जिससे सामग्री का व्यापक रूप से प्रसार संभव हुआ।
प्रौद्योगिकी का एकीकरण:
श्यामपट्ट का उपयोग चॉक का उपयोग करके पाठ प्रस्तुत करने तक सीमित था, जबकि डिजिटल शिक्षा में इंटरैक्टिव व्हाइटबोर्ड, प्रोजेक्टर और ऑनलाइन प्लेटफार्मों का उपयोग किया जाता है.
प्रौद्योगिकी ने दूरस्थ शिक्षा को बढ़ावा दिया है, जिससे छात्र दुनिया के किसी भी कोने से ऑनलाइन कक्षाएं ले सकते हैं, जो पारंपरिक श्यामपट्ट प्रणाली से संभव नहीं था.
डिजिटल समाधान सभी छात्रों के लिए अधिक सुलभ हैं, क्योंकि ये विभिन्न सीखने की शैलियों और जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
डिजिटल उपकरणों से शिक्षकों के लिए छात्रों की समझ का तुरंत मूल्यांकन करना आसान हो गया है, जिससे वे व्यक्तिगत शिक्षण अनुभव प्रदान कर सकते हैं।
मल्टीमीडिया और इंटरैक्टिव सामग्री के उपयोग से छात्रों की अवधारणाओं को समझने और उन्हें याद रखने में मदद मिलती है शिक्षक विभिन्न डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके पाठों को अधिक आकर्षक और प्रभावी बना सकते हैं।
छात्रों के लिए ऑनलाइन संसाधनों और कक्षाओं तक पहुँचने में अधिक लचीलापन मिलता है, जिससे वे अपनी गति से सीख सकते हैं.
संक्षेप में, श्यामपट्ट से डिजिटल शिक्षा की ओर का बदलाव एक शैक्षिक क्रांति है, जो पारंपरिक कक्षा को अधिक कुशल, समावेशी और प्रौद्योगिकी-संचालित भविष्य की ओर ले जा रहा है।