आज के नेता कल भारत की कोख का दुर्भाग्य न बनें: अंजनी सिंह
चंदौली। जिला पंचायत सदस्य अंजनी सिंह ने वर्तमान राजनीति की कार्यशैली पर चिंता जताते हुए कहा कि आज के दौर के सभी दलों के नेताओं को यह विचार करना होगा कि आने वाली पीढ़ियां कहीं उन्हें भारत की कोख का दुर्भाग्य न कहें। उन्होंने कहा कि राजनीति को जनसेवा, सरलता, सहानुभूति और सामाजिक एकता का माध्यम बनाए रखने की जरूरत है।
चंदौली

अंजनी सिंह
4:27 PM, Sep 19, 2026
लेखक: अंजनी सिंह
जनपद न्यूज़ टाइम्सचंदौली। जिला पंचायत सदस्य अंजनी सिंह ने वर्तमान राजनीति की कार्यशैली पर चिंता जताते हुए कहा कि आज के दौर के सभी दलों के नेताओं को यह विचार करना होगा कि आने वाली पीढ़ियां कहीं उन्हें भारत की कोख का दुर्भाग्य न कहें। उन्होंने कहा कि राजनीति को जनसेवा, सरलता, सहानुभूति और सामाजिक एकता का माध्यम बनाए रखने की जरूरत है।
अंजनी सिंह ने कहा कि भारतीय राजनीति में नैतिकता, सुचिता, सभ्यता, सहानुभूति और आदर्श जैसे मूल्यों का महत्व लगातार कम होता जा रहा है। योग्य व्यक्ति के संघर्ष, सेवा और सत्यनिष्ठा की जगह धनबल और प्रभाव का बढ़ता प्रभाव लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राजनीति में सत्ता हासिल करने और सत्ता पर बने रहने की प्रतिस्पर्धा के बीच जनहित और सामाजिक सरोकार पीछे नहीं छूटने चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और नेताओं को जाति-धर्म के नाम पर नफरत फैलाने, अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल और अनर्गल आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि जनता को भ्रम और झूठ से बचाया जाए तथा मतदाता को स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय का अवसर मिले।
अंजनी सिंह ने कहा कि भारत की सामाजिक विविधता उसकी ताकत है। सभी जाति और धर्म के लोगों के बीच आपसी भाईचारा, सद्भाव और अपनत्व बनाए रखना हर राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। नेताओं के आचरण का समाज पर सीधा प्रभाव पड़ता है, इसलिए उन्हें ऐसा व्यवहार करना चाहिए जिससे जनता और आने वाली पीढ़ियों को सकारात्मक संदेश मिले।
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उन्होंने कहा कि कानून और सरकारी व्यवस्थाओं में किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म या राजनीतिक दल के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। हर भारतीय को समान न्याय और समान अधिकार मिलना चाहिए। ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिसमें कानून किसी के शोषण या आर्थिक लाभ का माध्यम न बन सके।
जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि देश के भविष्य की जिम्मेदारी केवल सरकार या विपक्षी दलों की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े लोगों की भी है। सभी को मिलकर लोकतंत्र को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने, सामाजिक एकता कायम करने तथा भारत को सुरक्षित, समृद्ध और खुशहाल बनाने की दिशा में काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि आज के नेताओं को अपने आचरण और राजनीति पर गंभीरता से विचार करना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने पूर्वजों पर गर्व करें, उन्हें देश की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार न ठहराएं।
