करो या मरो के नारे ने ऐसा जज्बा भरा की क्रांतिकारियों ने 1942 में ही फहरा दिया था तिरंगा।
देश की आजादी के लिए किए जा रहे आंदोलन में चंदौली के के वीरों की कोई शानी नहीं थी।महात्मा गांधी के एक नारे ने करो या मरो ने ऐसा जज्बा जगाया कि क्रांतिवीरों ने 1942 में ही सैयदराजा थाना और धानापुर थाने में आजादी के मतवालों ने तिरंगा फहरा दिया था।इस दौरान अंग्रेजों की गोली से 3 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर गति को प्राप्त हो गए थे।जिनकी अमर कहानी आज भी प्रेरणा दे रही है।
चंदौली

2:23 PM, Aug 13, 2026
चंदौली । देश की आजादी के लिए किए जा रहे आंदोलन में चंदौली के के वीरों की कोई शानी नहीं थी।महात्मा गांधी के एक नारे ने करो या मरो ने ऐसा जज्बा जगाया कि क्रांतिवीरों ने 1942 में ही सैयदराजा थाना और धानापुर थाने में आजादी के मतवालों ने तिरंगा फहरा दिया था।इस दौरान अंग्रेजों की गोली से 3 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर गति को प्राप्त हो गए थे।जिनकी अमर कहानी आज भी प्रेरणा दे रही है।
महात्मा गांधी ने 9 अगस्त 1942 को जब करो या मरो का सिंहनाद किया तो उसकी गूंज धानापुर और सैयदराजा की धरती तक पहुंची थी।धानापुर थाने में वीरों ने 16 अगस्त को और सैयदराजा थाने में 28 अगस्त 1942 को आजादी का तिरंगा फहरा कर आजादी की घोषणा कर दी थी।इस प्रयास में 16 अगस्त 1942 को धानापुर में हीरा सिंह, महंगू सिंह और रघुनाथ सिंह सैयदराजा में और 28 अगस्त को श्रीधर, फेकू राय और गणेश सिंह शहीद हो गए थे।इस दौरान दोनों जगहों पर दर्जनों क्रांतिकारी घायल भी हुए थे।धानापुर व सैयदराजा कांड की गूंज ब्रिटेन की संसद में भी गूंजा था और प्रधानमंत्री चर्चिल को बयान देने को मजबूर कर दिया था।
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9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के मुंबई अधिवेशन में करो या मरो का एक नारा दिया तो पूरे देश की जनता इस आजादी की लड़ाई में कूद पड़ी थी। उसी दौरान जगह-जगह आंदोलन शुरू हुए और तमाम सरकारी कार्यालय पर तिरंगा फहराया गया।उसी पक्ष में 9 अगस्त को धानापुर में स्वतंत्रता सेनानी कांता प्रसाद विद्यार्थी की अगुवाई में इसकी योजना बनाई गई। लेकिन उस समय अंग्रेजी हुकूमत चौकन्ना हो चुकी थी।इसके बाद भी सैकड़ों की संख्या में स्वतंत्रता सेनानियों ने हाथों में तिरंगा लिए धानापुर थाने को घेर लिया।लोग थाने पर तिरंगा फहराने की जिद करने लगे।दारोगा ने तिरंगा फहराए जाने से मना कर दिया। इसके बाद उग्र हुए अंग्रेजी हुकूमत ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर गोलियां चलवा दी। इस बीच 3 क्रांतिकारी हीरा सिंह, रघुनाथ सिंह और मंहगू सिंह को गोली लग गईगोली लगने के बाद तीनों वीर गति को प्राप्त हो गए इससे क्रांतिकारियों का गुस्सा और भड़क गया. बताया जाता है कि लोगों ने थाने में दरोगा सहित 3 सिपाहियों को घेर कर जिंदा जला डाला था। जिसके बाद वीरों ने धानापुर थाने पर तिरंगा फहराया इस घटना से पूरे देश में हलचल मच गई थी।
लगोरखपुर के चौरी-चौरा और काकोरी कांड की तरह धानापुर कांड भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है. हालांकि इसे उतना महत्व नहीं मिला. जितना मिलना चाहिए था.ल। देश की आजादी से बहुत पहले धानापुर में स्वतंत्रता सेनानियों ने सबसे पहले तिरंगा फहराया था। महात्मा गांधी द्वारा चलाए जा रहे असहयोग आंदोलन के रुकने के बाद भी धानापुर में क्रांतिकारियों का जोश उफान पर रहा था।इस घटना के बाद, 136 लोगों पर नामजद मुकदमा दर्ज हुआ। इनमें से 16 को आजीवन कारावास, 28 को 10 साल की सजा, 7 को सात साल की सजा, और एक व्यक्ति को 5 साल की सजा सुनाई गई। धानापुर कांड आज भी उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता है, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। देश आजादी का 80 वां वर्ष मनाने जा रहा है।जनपद में आठ अगस्त से तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है।
