24 घंटे निर्जला व्रत रख सुहागिनों ने मांगा पति की दीर्घायु का आशीर्वाद
चंदौली। पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर सुहागिनों ने सोमवार को हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखा। महिलाओं ने करीब 24 घंटे तक अन्न-जल का त्याग कर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। ग्रामीण क्षेत्रों में भी तीज को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह दिखाई दिया।
चंदौली

5:32 PM, Sep 14, 2026
मंदिरों में भगवान शिव और माता पार्वती की हुई पूजा-अर्चना, बाजारों में देर शाम तक रही रौनक
चंदौली। पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर सुहागिनों ने सोमवार को हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखा। महिलाओं ने करीब 24 घंटे तक अन्न-जल का त्याग कर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। ग्रामीण क्षेत्रों में भी तीज को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह दिखाई दिया।
सुबह से ही महिलाएं व्रत और पूजन की तैयारियों में जुटी रहीं। महिलाओं ने हाथों में मेहंदी रचाई और नए वस्त्र धारण कर सोलह शृंगार किया। शाम को कई स्थानों पर महिलाओं ने गीत गाते हुए नदी से बालू लाकर गौरा-गौरी और गणेश की आकृतियां बनाईं। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की पूजा की गई। पूजन के दौरान खीरा, अनरसा, अंकुरी, फल, मिठाई, मक्का समेत विभिन्न प्रकार के नैवेद्य अर्पित किए गए। कई मंदिरों और पूजा स्थलों पर ब्राह्मणों ने महिलाओं को हरितालिका व्रत की कथा सुनाई।
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शहर से लेकर गांवों तक शिव मंदिरों में महिलाओं की भीड़ रही। महिलाओं ने पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक किया और भगवान शिव व माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित की। कई जगह केले के पत्तों से मंडप बनाकर गौरी-शंकर की प्रतिमा स्थापित की गई। महिलाओं ने भजन-कीर्तन करते हुए जागरण किया और आरती की। अविवाहित युवतियों ने भी मनोवांछित वर और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना को लेकर व्रत रखा।
हरितालिका तीज के चलते बाजारों में भी काफी चहल-पहल रही। सुहाग सामग्री, फल, मिठाई और पूजन सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ रही। देर शाम तक शहर की गलियां और बाजार गुलजार रहे। व्रती महिलाएं मंगलवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद पारण कर अन्न-जल ग्रहण करेंगी।
पंडित घनश्याम दीक्षित ने बताया कि हरितालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। इसी तप और व्रत की परंपरा से हरितालिका तीज का संबंध माना जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से, जबकि अविवाहित युवतियां मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
