पुश्तैनी मकान पर पुत्र और पौत्र हथौड़ा चलाने को विवश
लोग अब अपने पिता और दादा और खुद के बनाए आशियाने और दुकानों को खुद के हाथों तोड़ने को विवश है। कुछ मकान और दुकान नए है तो कुछ पुराने हैं।जिसमें दादा,पिता और पुत्र रोजगार कर जीवन यापन करता है।यह शहर आज़ादी के दौर से बसा है। जीटी रोड का किनारा ही इसका मुख्य शान हुआ करता है। जीटी रोड के किनारे होटल, लाज,सब्जी मंडी,कई विभागों के कार्यालय,पार्क,मंदिर ,मस्जिद, दुकान हैं।आज इन पर बुलडोजर चल रहा है।
मुगलसराय, चंदौली

4:19 PM, May 2, 2026
बदल रहा मुगलसराय की तस्वीर
चंदौली। जनपद की एक मात्र शहर का मुख्य मार्ग और बाजार इतिहास के पन्ने में समेटने की तैयारी में है। वर्षों से चली आ आशंका, संभावना और चर्चाओं पर विराम लग रहा है।जब सड़क चौड़ीकरण के जद में आए अतिक्रमण को पिछले तीन दिनों से हटाने लगा है। लोग अब अपने पिता और दादा और खुद के बनाए आशियाने और दुकानों को खुद के हाथों तोड़ने को विवश है। कुछ मकान और दुकान नए है तो कुछ पुराने हैं।जिसमें दादा,पिता और पुत्र रोजगार कर जीवन यापन करता है।यह शहर आज़ादी के दौर से बसा है। जीटी रोड का किनारा ही इसका मुख्य शान हुआ करता है। जीटी रोड के किनारे होटल, लाज,सब्जी मंडी,कई विभागों के कार्यालय,पार्क,मंदिर ,मस्जिद, दुकान हैं।आज इन पर बुलडोजर चल रहा है।
जीटी रोड दक्षिण और उतरी दो हिस्से में बंटा है। एक हिस्सा रेलवे की सीमा को छूता है।दूसरा हिस्सा मुख्य बाजार है।जिसमें रिहायशी मकान और दुकान है।सड़क चौड़ीकरण के पहले से ही नापी, निशान और नोटिस के जरिए अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया।जब नगर में सड़क बन रही थी।कुछ नहीं तोड़ा गया लोग आश्वत हो गए कि अब नहीं तोड़ा जाएगा।लेकिन सड़क निर्माण के बाद की कई निर्माण बाकी है।इसको बनाने के लिए जगह की आवश्यकता थी। जब प्रशासन सक्रिय हुआ तो और बुलडोजर के साथ मैदान में आया तो लोग तोड़ फोड़ करने लगा।आज अभियान का तीसरा दिन है।उतरी पटरी की ओर बुलडोजर चल रहा है।अतिक्रमण के जद में आए हिस्से को तोड़ दिया जा रहा है।
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नगर में सड़क चौकड़ीकरण एक दौरान जद में आई इमारतों को तोड़ा जा रहा है। दक्षिण पटरी के बाद शनिवार से उतरी पटरी के इमारतों पर पीडब्ल्यूडी का बुलडोजर चल रहा हालांकि प्रशासन की सख्ती के चलते लोगों ने खुद से निर्माण को तोड़ने शुरु कर दिया। नगर के विकास के लिए लोग आवाज उठाते रहे। वर्षों पुराने बाजार पर बुलडोजर चल रहा है।
जीटी रोड के उत्तर तरफ बनी इमारतों में परिवारों की तीन पुश्ते बीत गई है। जिस इमारत में खेलकूद के बड़े हुए, आज लोग उसी पर खुद से हथौड़ा चलाने को विवश है।नगर की आबादी जैसे जेसे बढ़ती गई।बाजार का विकास होता गया।पहले कोई मानक नहीं था।विकास प्राधिकरण की कोई अवधारणा नहीं थी।नगर पालिका ने कभी ध्यान नहीं दिया।इसका नतीजा यह रहा कि जीटी रोड के किनारे दुकानें और आशियाने बनते गया।आबादी बढ़ी तो जीटी रोड को चौड़ा किया गया।पाथवे का निर्माण कराया गया। पहले एक मात्र जीटी रोड था जिस पर कोई डिवाइडर नहीं रहा।
