चुप हो जाओ कबीरः निम्नमध्यवर्गीय जीवन के सरोकार की कविता है - चन्द्रेश्वर
02 जुलाई 1976 को पैदा हुए 46 वर्षीय कवि-उपन्यासकार श्री रामजी प्रसाद 'भैरव' उत्तरप्रदेश,ज़िला चन्दौली के खण्डवारी चहनियाँ में रहते हैं | 'चुप हो जाओ कबीर' उनकी 90 कविताओं का पहला संकलन है जिसे वाराणसी के राष्ट्रीय चेतना प्रकाशन ने वर्ष 2021 में पेपर बैक के रूप में प्रकाशित किया है | इसमें कुल 127 पृष्ठ हैं | इसके पहले वे अपने तीन-चार उपन्यास प्रकाशित करा चुके हैं | वे 'नवरंग' वार्षिक पत्रिका एवं '

1:05 PM, Dec 30, 2025
02 जुलाई 1976 को पैदा हुए 46 वर्षीय कवि-उपन्यासकार श्री रामजी प्रसाद 'भैरव' उत्तरप्रदेश,ज़िला चन्दौली के खण्डवारी चहनियाँ में रहते हैं | 'चुप हो जाओ कबीर' उनकी 90 कविताओं का पहला संकलन है जिसे वाराणसी के राष्ट्रीय चेतना प्रकाशन ने वर्ष 2021 में पेपर बैक के रूप में प्रकाशित किया है | इसमें कुल 127 पृष्ठ हैं | इसके पहले वे अपने तीन-चार उपन्यास प्रकाशित करा चुके हैं | वे 'नवरंग' वार्षिक पत्रिका एवं 'नवोत्कर्ष' स्मारिका का संपादन कर चुके हैं |
इतना ही नहीं, वे उत्तरप्रदेश हिन्दी संस्थान सहित अन्य कुछ सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा भी पुरस्कृत हो चुके हैं |
'चुप हो जाओ कबीर' की ज़्यादातर कविताएँ अपने आसपास के जीवन,समाज एवं परिवेश में पैदा हुईं विसंगतियों की उपज हैं | कवि अपनी इन लगभग सभी कविताओं में पाठकों को समकालीन सामाजिक चिंताओं से रूबरू कराता है | उसकी कविताएँ देश-दुनिया,ग़रीब किसान व निम्नमध्यवर्गीय जीवन के सरोकारों से निर्मित हुई हैं | वह जीवन में साप -सीढ़ी के खेल से बख़ूबी परिचित है | वह इधर देश व समाज में आए नकारात्मक परिवर्तन से आंदर ही अंदर आहत है | वह अपने समय के कबीर को चुप हो जाने का मशविरा देता है --"कबीर तुम क्यों/ उपदेश देते हो /क्या ज़रूरत आन पड़ी/अंधविश्वास और रूढ़ियों में जकड़े/ इस समाज को/सावधान करने की .........तुम नहीं जानते कबीर/यह तुम्हारी सीख पर नहीं चलेंगे/यह तुम्हारी तर्कसंगत बातों को नास्तिकता का दर्ज़ा देंगे/तुम्हें मूर्ख कह देंगे/चुप हो जाओ कबीर ......!"
कवि भैरव की कविताओं में भले ही कोई शिल्पगत चमत्कार न दिखाई दे, कोई शाब्दिक या भाषिक कसावट न हो ; फिर भी उसका सामाजिक बोध और कवि विवेक सजग है | वह पौराणिक या मिथकीय पात्रों पर भी कविताएँ लिखता है और उन्हें समकालीनता प्रदान करता है | 'द्रौपदी','तुम बाँसुरी मत बजाना','हस्तिनापुर में जुआ' या 'सुनो त्रिविक्रम' आदि ऐसी ही कविताएँ हैं |
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कवि रामजी प्रसाद 'भैरव' के लिए मेरी शुभकामनाएँ |
वे आगे चलकर हिन्दी कविता के कोष में अवश्य
ही वृद्धि करेंगे |
