श्रद्धा और आस्था के भंवर में भीड़ का स्वयं नियंत्रण
चंदौली। जल में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य की आराधना प्रकृति का अदभुत संगम है।घाटों पर उमड़ी भीड़ इस बात की गवाह बनी कि छठ वास्तव में प्रकृति पूजन का प्रतिबिम्बित है।घाटों पर उमड़ी भीड़ न किसी के द्वारा नियंत्रित की जाती है न ही प्रशासन किसी को भी लाइन में खड़ा करता है। सब कुछ अदृश्य शक्ति के द्वारा भीड नियंत्रित किया जाता है
चंदौली

धानापुर दशमी पोखरे पर अर्घ्य देते ब्लाक प्रमुख अजय सिंह
7:41 AM, Oct 28, 2025
घाटों पर उमड़ी भीड़ ,लोग किए एक दूसरे का सहयोग
चंदौली। जल में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य की आराधना प्रकृति का अदभुत संगम है।घाटों पर उमड़ी भीड़ इस बात की गवाह बनी कि छठ वास्तव में प्रकृति पूजन का प्रतिबिम्बित है।घाटों पर उमड़ी भीड़ न किसी के द्वारा नियंत्रित की जाती है न ही प्रशासन किसी को भी लाइन में खड़ा करता है। सब कुछ अदृश्य शक्ति के द्वारा भीड नियंत्रित किया जाता है।न कोई किसी को धक्का देता है न ही आगे बढ़ने की होड लगती है।चारों ओर केवल आस्था और उसमें खोए लोग रहते हैं। अर्घ्य के बाद भीड स्वत गतिमान होती है।सब एक दूसरे का सहयोग करते हैं।पुलिस केवल सुरक्षा के नाम तैनात रहती है। हालांकि सरोवरों में घटित घटनाओं से प्रशासन चिंतित रहता है।
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लोक आस्था के महापर्व डाला छठ पर सोमवार की शाम और मंगलवार की सुबह में गंगा और तालाबों पर पांच लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। 17 गंगा घाटों और कई दर्जन तालाबों पर कई हजार से ज्यादा व्रतियों ने अस्ताचलगामी और उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर सुख समृद्धि की कामना की। वहीं, जगह-जगह छठ मइया के गीत गूंजते रहे। घरों में सुबह से अर्घ्य देने की तैयारियां शुरू हो गई थीं। व्रती महिलाओं ने स्नान के बाद सूप और दउरी तैयार की। इसमें फल, ठेकुआ, चावल से बनी मिठाई, फूल, माला, दीपक, रोरी, सिंदूर, कपूर, अगरबत्ती आदि सजाकर दोपहर बाद परिवार के लोगों के साथ सरोवर, नदी घाटों की ओर चल पड़े। विभिन्न इलाकों से व्रती बैंडबाजा के साथ भी सरोवर पर पहुंचे तो कुछ महिला व्रती घाटों पर लेट कर पहुंची। जल में उतरी और कमर भर पानी होने में खड़े होकर भगवान भाष्कर के अस्त होने का इंतजार किया। कई जगहो पर समाजसेवीयों, नेताओं व पूजा समिति के सदस्यों ने व्रतियों को अर्घ्य के लिए दूध और जल नारियल, फुल माला आदि उपलब्ध कराए। आस्थावानों की भीड़ उमड़ने से घाटों पर जगह कम पड़ गई। छठ महापर्व की तैयारियाँ को लेकर प्रशासन एलर्ट रहा।जिला प्रशासन ने भक्तों की सुरक्षा और सुविधा के लिए कमर कस ली । खासकर भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। छठ घाटों पर भारी भीड़ की आशंका को देखते हुए, अधिकारियों ने महत्वपूर्ण घाटों का निरीक्षण किया।विशेष रूप से 'अर्घ्य' (प्रार्थना चढ़ाने) और स्नान के दौरान भक्तों की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने पर जोर दिया। इन सब के बाद भी घाटों पर भीड़ स्वयं नियंत्रित रहती है। लोग एक दूसरे की सहयोग की भावना से तत्पर रहते हैं। सामाजिक और राजनीतिक लोग भी सहयोग में लीन रहे। चारों ओर उत्साह और उल्लास का बोलबाला रहा है।कहीं किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की संभावना नहीं रहती है।श्रद्धा और आस्था के भंवर में भीड़ स्वत नियंत्रित रहती है।प्रशासन और पुलिस अपनी जिम्मेदारी पर खड़े रहे।
