बाढ़ की भेंट चढ़ा समृद्धि वन का पौधारोपण महायज्ञ, पांच हजार पौधे हुए खराब
शहाबगंज (चंदौली)। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से केरायगांव में समृद्धि वन के तहत आयोजित पौधारोपण महायज्ञ अब बाढ़ की भेंट चढ़ गया है। एक हेक्टेयर भूमि में करीब पांच हजार विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे, लेकिन कर्मनाशा नदी में आई बाढ़ के पानी से अधिकांश पौधे खराब होकर सूख गए। इससे पौधारोपण अभियान की उपयोगिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
शहाबगंज, चंदौली

4:38 PM, Sep 16, 2026
विनोद कुमार
जनपद न्यूज़ टाइम्स
पौधरोपण के दौरान लिया गया फोटो (फाइल फोटो)
शहाबगंज (चंदौली)। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से केरायगांव में समृद्धि वन के तहत आयोजित पौधारोपण महायज्ञ अब बाढ़ की भेंट चढ़ गया है। एक हेक्टेयर भूमि में करीब पांच हजार विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे, लेकिन कर्मनाशा नदी में आई बाढ़ के पानी से अधिकांश पौधे खराब होकर सूख गए। इससे पौधारोपण अभियान की उपयोगिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
समृद्धि वन के तहत केरायगांव में पौधारोपण अभियान की शुरुआत क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह और बीडीओ दिनेश सिंह की मौजूदगी में पौधे लगाकर की गई थी। अभियान के दौरान एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में करीब पांच हजार पौधे रोपे गए थे। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पौधों के बड़े होने से क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
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लेकिन कुछ ही समय बाद क्षेत्र में आई बाढ़ ने पौधों को अपनी चपेट में ले लिया। लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण बड़ी संख्या में पौधे सूख गए। ग्रामीणों का कहना है कि केरायगांव की उक्त भूमि प्रत्येक वर्ष बाढ़ के पानी से प्रभावित होती है। ऐसे में यहां बड़े पैमाने पर पौधारोपण किए जाने से पहले भूमि की भौगोलिक स्थिति और बाढ़ की संभावना का आकलन किया जाना जरूरी था।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित भूमि पर हजारों पौधे लगाने के बजाय ऐसी जगह का चयन किया जाना चाहिए था, जहां पौधों के सुरक्षित रूप से विकसित होने की संभावना हो। यदि स्थल चयन और पौधों की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो सरकारी धन और श्रम खर्च होने के बावजूद पौधारोपण अभियान का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकेगा। लोगों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पौधारोपण के लिए उपयुक्त भूमि का चयन करने और सूखे पौधों के स्थान पर टिकाऊ योजना बनाने की मांग की है।
