रामजी प्रसाद 'भैरव जी' की उत्कृष्ट कृति है सुनो आनंद - - - विनय कुमार वर्मा

भगवान बुद्ध के जीवन के अंतिम तीन महीने के कथानक को उठाते हुए प्रसिद्ध उपन्यासकार रामजी प्रसाद 'भैरव जी' ने इस पुस्तक में अपनी लेखनी का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण पेश किया है । भैरव जी उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से प्रेमचंद पुरस्कार से पुरस्कृत हैं।उनकी रक्तबीज के वंशज व शबरी उपन्यास भी काफी अच्छा है।

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रामजी प्रसाद "भैरव"


10:02 AM, Nov 16, 2025

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विनय कुमार वर्मा

जनपद न्यूज़ टाइम्स


भगवान बुद्ध के जीवन के अंतिम तीन महीने के कथानक को उठाते हुए प्रसिद्ध उपन्यासकार रामजी प्रसाद 'भैरव जी' ने इस पुस्तक में अपनी लेखनी का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण पेश किया है । भैरव जी उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से प्रेमचंद पुरस्कार से पुरस्कृत हैं।उनकी रक्तबीज के वंशज व शबरी उपन्यास भी काफी अच्छा है।

इस पुस्तक में भगवान बुद्ध के संपूर्ण जीवन वांग्मय को तीन महीने के कथानक में पिरो दिया गया है। यह उपन्यास मूलतः भगवान बुद्ध व उनके अनन्य शिष्य आनंद के बीच संवाद है। बुद्ध ने अपने शिष्य की जिज्ञासा को शांत करने के लिए उत्तर देते समय उन्हें संबोधित किया "सुनो आनंद" इसी को इस उपन्यास का शीर्षक बनाया गया है।

इन संवादों के माध्यम से भगवान बुद्ध ने अपने जीवन वृतांत से लगायत निर्वाण तक की कथा को अलग-अलग टुकड़ों में बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया है।

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इस उपन्यास को पढ़ते समय ऐसा लगता है कि भगवान बुद्ध के जीवन का चलचित्र सामने चल रहा हो। बुद्ध ने अपने संस्मरणों को भी आनंद को बताया है। उनके कई शिष्यों के प्रवज्या लेने की कहानी इस उपन्यास को और भी रोचक बनाती है। रामजी प्रसाद "भैरव जी" के सभी उपन्यास, कहानी व कविताएं बेहतरीन होती हैं।...लेकिन सुनो आनंद मेरी दृष्टि में उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति है।

इस उपन्यास के माध्यम से सरल व सहज तरीकों में भगवान बुद्ध द्वारा जीवन से जुड़े व सामाजिक प्रश्नों का भी उत्तर पाठक पाएंगे। यह उपन्यास केवल कहानी नहीं बल्कि जीवन दर्शन है।

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