घाटों पर प्रसाद ,आशीर्वाद और सेवा के लिए उमड़े लोग
चंदौली। लोक आस्था और सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व मंगलवार की उगते आदित्य के आभा मंडल को अर्घ्य देकर समाप्त हो गया।

6:34 AM, Oct 28, 2025
चंदौली। लोक आस्था और सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व मंगलवार की उगते आदित्य के आभा मंडल को अर्घ्य देकर समाप्त हो गया।
व्रती महिलाओं ने सरोवरों में खड़े होकर अपने परिजन के साथ पूजा अर्चना की।इसके बाद व्रती माताओं, बहनों के आशीर्वाद पाने के लिए घर से लेकर घाट तक लोग उमड़ पड़े। प्रसाद पाने के लिए लोग झोली फैला दिए ।प्रसाद लेकर माथे पर लगाया।इसके पहले छठ व्रतियों की सेवा,सहयोग के लिए लोग घाटों पर तत्पर रहे।पूजन के समय जिस चीज की जरूरत पड़ी उसकी तुरंत व्यवस्था की गई।जनपद में भोर से शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक के सरोवरों पर लोगों की भीड़ आस्था के सैलाब में बदल गई। आदित्य की आभा के साथ सरोवरों के आसपास नारे गूंजने लगे।
छठ पूजा के दौरान लोग प्रसाद, आशीर्वाद और सेवा के लिए बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं। यह पर्व प्रकृति, सूर्य देव और छठी मैया के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक है, जिसमें लोग श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रसाद बनाते हैं और एक-दूसरे से बांटते हैं। प्रसाद और सेवा के भाव को दर्शाने वाले लोगों के उत्साह और जुटान को देखकर यह पर्व भक्ति, समर्पण और पारिवारिक प्रेम की एक सुंदर मिसाल बन जाता है। छठ का प्रसाद, जिसमें ठेकुआ, चावल के लड्डू और ताज़े फल जैसे गुड़ और गेहूं से बनी चीजें शामिल होती हैं, पवित्रता और प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है। प्रकृति और सूर्य देव का सम्मान: इस पर्व में गन्ने और अन्य प्राकृतिक उपज को भी प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है, जो सूर्य देव के आशीर्वाद और नई फसल का प्रतीक है। इस पर्व में कई स्वयंसेवक और भक्त छठ घाटों को तैयार करने, स्वच्छता बनाए रखने और श्रद्धालुओं की मदद करने के लिए सेवा करते हैं। छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया में लोगों की गहरी आस्था और श्रद्धा का प्रदर्शन है, जो उन्हें शक्ति और समृद्धि का आशीर्वाद देती है। इसलिए छठ पूजा में प्रसाद के रूप में फल-फूलों का प्रयोग अधिक होता है। छठ पूजा पर भक्त एक-दूसरे से प्रसाद मांगकर ग्रहण करते है।छठ का प्रसाद मांगकर ग्रहण से भगवान सूर्य और देवी षष्ठी के प्रति भक्तों की आस्था प्रकट होती है।प्रसाद मांगकर लेने से मान-सम्मान बढ़ता है और दुर्गुण समाप्त होते हैं। इसलिए छठ का प्रसाद मांगकर लेने में कोई भी भक्त संकोच नहीं करता है। इससे मां छठी मैया और भगवान सूर्य देव प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं. प्रसाद मांग कर ग्रहण करने से सुख समृद्धि हमेशा रहती है।
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छठ पूजा में प्रसाद में ठेकुआ, चावल के लड्डू, फल और कई प्रकार की पूजा सामग्री शामिल होती है, जिन्हें विशेष रूप से व्रती द्वारा तैयार किया जाता है। यह प्रसाद पूरी पवित्रता और सावधानी के साथ बनाया जाता है, और इसमें शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि छठी मैया का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
माना जाता है कि व्रती अपनी आस्था और त्याग से प्रसाद तैयार करते हैं और उसे देवी छठी मैया को अर्पित करते हैं। छठी मैया की कृपा पाने के लिए लोग इस प्रसाद को पवित्र मानते हैं और इसलिए इसे स्वयं बनाने के बजाय व्रती से मांग कर ग्रहण करते हैं। यह मान्यता है कि मांग कर खाने से प्रसाद का पवित्र प्रभाव और बढ़ जाता है, क्योंकि इसे व्रती की अनुमति और आशीर्वाद के साथ ग्रहण किया जाता है।इसके अतिरिक्त, मांग कर प्रसाद खाने का महत्व यह भी है कि इससे एकता और सामाजिक समरसता की भावना को बल मिलता है। व्रतियों के परिवार और पड़ोसी भी इस प्रसाद को लेकर गर्व और सम्मान की भावना से इसे ग्रहण करते हैं। प्रसाद मांग कर खाने से एक विनम्रता का भाव भी उत्पन्न होता है, क्योंकि यह समाज में इस बात की शिक्षा देता है कि समर्पण और श्रद्धा से किसी चीज को प्राप्त करना अधिक मूल्यवान है। वहीं लोगों ने वृतियों का पूरा सहयोग और सेवा किया।
