16 अगस्त 1942 को आजादी के दीवानों ने जान की बाजी लगाकर थाने पर लहराया था तिरंगा
धानापुर। स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में धानापुर की धरती का विशेष स्थान है। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान यहां के आजादी के दीवानों ने अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती देते हुए धानापुर थाने पर तिरंगा फहरा दिया था। इस दौरान अंग्रेजी पुलिस की गोलीबारी में कई क्रांतिकारी शहीद हुए। वीर सपूतों के अदम्य साहस और बलिदान की यह गाथा आज भी क्षेत्र के लोगों को देशभक्ति की प्रेरणा देती है।
चंदौली

शहीद पार्क में शहीद हीरा सिंह, महंगू सिंह और रघुनाथ सिंह का लगा प्रतिमा
10:40 AM, Aug 16, 2026
थाना भवन में शहीद स्थल पर बना स्मारक
चंदौली। धानापुर स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में धानापुर की धरती का विशेष स्थान है। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान यहां के आजादी के दीवानों ने अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती देते हुए धानापुर थाने पर तिरंगा फहरा दिया था। इस दौरान अंग्रेजी पुलिस की गोलीबारी में कई क्रांतिकारी शहीद हुए। वीर सपूतों के अदम्य साहस और बलिदान की यह गाथा आज भी क्षेत्र के लोगों को देशभक्ति की प्रेरणा देती है।
पुराना थाना भवन का मुख्य द्वार जहां थानेदार द्वारा गोली चलाई गई थी और क्रांतिकारियों को गोली लगी थी (फाइल फोटो)
1942 में धानापुर थाना कांड ने रचा इतिहास
वर्ष 1942 में जब महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन की चिंगारी पूरे देश में फैल रही थी, तब धानापुर भी इससे अछूता नहीं रहा। क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों और ग्रामीणों में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश था। आंदोलन के दौरान धानापुर क्षेत्र में सरकारी कार्यालयों और अंग्रेजी शासन के खिलाफ विरोध तेज हो गया था।
16 अगस्त 1942 का दिन धानापुर के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। बड़ी संख्या में आजादी के दीवाने धानापुर थाने पर तिरंगा फहराने के लिए पहुंच गए। इससे पहले क्रांतिकारियों की ओर से थाने पर तिरंगा फहराने की सूचना अंग्रेजी पुलिस तक पहुंच चुकी थी। पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने की तैयारी कर ली थी।
अंग्रेजी पुलिस ने बरसाईं गोलियां
तिरंगा फहराने के लिए पहुंचे आंदोलनकारियों के जोश और संख्या को देखकर अंग्रेजी पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। क्रांतिकारी पीछे हटने को तैयार नहीं थे। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस ने आंदोलनकारियों पर गोलियां चला दीं। अंग्रेजी पुलिस की गोलीबारी के बावजूद आजादी के मतवालों के कदम नहीं रुके।
क्रांतिकारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना थाने की ओर बढ़ना जारी रखा और आखिरकार धानापुर थाने पर तिरंगा फहरा दिया। इस संघर्ष में हीरा सिंह, रघुनाथ सिंह और महंगू सिंह समेत कई स्वतंत्रता सेनानियों ने बलिदान दिया। इन वीरों की शहादत ने धानापुर के स्वतंत्रता आंदोलन को नई ताकत दी।
धानापुर क्रांति के हीरो थे कमला प्रसाद विद्यार्थी
धानापुर के स्वतंत्रता आंदोलन में कमला प्रसाद विद्यार्थी की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनके नेतृत्व और प्रेरणा से क्षेत्र के युवाओं में अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का जज्बा पैदा हुआ। आंदोलनकारियों ने अंग्रेजी शासन की परवाह किए बिना आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाया।
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बताया जाता है कि धानापुर की इस क्रांति के दौरान आंदोलनकारियों का मनोबल इतना ऊंचा था कि अंग्रेजी पुलिस की बंदूकों और गोलियों के सामने भी वे डटे रहे। तिरंगा फहराना उनके लिए केवल झंडा लगाने की घटना नहीं, बल्कि अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने का प्रतीक था।
दस दिनों तक फहराता रहा तिरंगा
धानापुर कांड की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि 16 अगस्त से 26 अगस्त 1942 तक यहां तिरंगा फहराता रहा। इस अवधि में धानापुर और आसपास का क्षेत्र अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का प्रमुख केंद्र बन गया था। धानापुर के इस साहसिक आंदोलन की गूंज दूर-दूर तक पहुंची। यहां तक कि इसकी चर्चा ब्रिटेन की संसद में भी होने की बात इतिहास में मिलती है।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान धानापुर के लोगों ने अंग्रेजी शासन की नीतियों का जमकर विरोध किया। सरकारी व्यवस्था को चुनौती देने से लेकर तिरंगा फहराने तक आंदोलनकारियों ने जोखिम उठाया। कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और अनेक लोगों को अंग्रेजी शासन का दमन झेलना पड़ा।
16 अगस्त को मनाया जाता है शहीद दिवस
धानापुर कांड में शहीद हुए वीर सपूतों की याद में आज भी 16 अगस्त को शहीद दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर शहीद स्मारक पर कार्यक्रम आयोजित कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। क्षेत्र के लोग उनके बलिदान को याद करते हुए देश की स्वतंत्रता में उनके योगदान को नमन करते हैं।
धानापुर में शहीदों की स्मृति में बना स्मारक आज भी नई पीढ़ी को उस दौर की याद दिलाता है। यहां पहुंचने वाले लोगों को यह अहसास होता है कि देश को आजादी आसानी से नहीं मिली थी, बल्कि इसके लिए हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने संघर्ष किया और अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
शहीदों की याद में बना शहीद पार्क
धानापुर में अमर शहीदों की स्मृति को सुरक्षित रखने के लिए शहीद पार्क भी बनाया गया है। यहां शहीदों की याद में कार्यक्रम होते हैं और स्वतंत्रता आंदोलन की गाथा लोगों को सुनाई जाती है। हर वर्ष 16 अगस्त को यहां होने वाले आयोजन में क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में शामिल होकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
धानापुर की धरती पर 1942 में लहराया गया तिरंगा आजादी के संघर्ष का प्रतीक बन गया। हीरा सिंह, रघुनाथ सिंह, महंगू सिंह और आंदोलन में योगदान देने वाले तमाम ज्ञात-अज्ञात सेनानियों का बलिदान इतिहास के पन्नों में हमेशा अमर रहेगा। उनके साहस ने साबित किया कि जब देश की आजादी का सवाल हो तो निहत्थे लोग भी अत्याचारी सत्ता के सामने सीना तानकर खड़े हो सकते हैं।
