राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षाविद् नेढ़ी निवासी मास्टर नजमुद्दीन का निधन, शिक्षा जगत में शोक की लहर
राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं शिक्षक नेता मास्टर नजमुद्दीन का मंगलवार सुबह लगभग 5:30 बजे निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही शिक्षा जगत, शिक्षक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों ने इसे शिक्षा और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
चंदौली

3:55 PM, Jul 28, 2026
चंदौली/वाराणसी। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं शिक्षक नेता मास्टर नजमुद्दीन का मंगलवार सुबह लगभग 5:30 बजे निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही शिक्षा जगत, शिक्षक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों ने इसे शिक्षा और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
मास्टर नजमुद्दीन का पैतृक निवास चंदौली जनपद के मारूफपुर स्थित नेढ़ी गांव में था। उन्होंने अपने लंबे शैक्षिक जीवन में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे गवर्नमेंट कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य, उत्तर प्रदेश राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय सचिव तथा ए.ओ. मुस्लिम इंटर कॉलेज, लल्लापुरा, वाराणसी के सदस्य रहे।
शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के साथ-साथ शिक्षकों, कर्मचारियों और पेंशनरों की समस्याओं के समाधान के लिए भी निरंतर संघर्ष किया। शिक्षक हितों की बुलंद आवाज़ के रूप में उनकी विशेष पहचान थी।
मास्टर नजमुद्दीन अपनी सादगी, ईमानदारी, स्पष्टवादिता और सक्रिय कार्यशैली के लिए जाने जाते थे। सामाजिक, शैक्षिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भूमिका हमेशा अग्रणी रही। वे समाज के हर वर्ग के लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनते थे और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते थे। इसी कारण शिक्षक समाज के साथ-साथ आम नागरिकों के बीच भी उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त था।
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उनके निधन पर शिक्षक संगठनों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि मास्टर नजमुद्दीन का संपूर्ण जीवन शिक्षा, संगठन और समाज सेवा के लिए समर्पित रहा तथा उनके विचार और कार्य नई पीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
परिजनों के अनुसार, मंगलवार को अस्र की नमाज़ के बाद शाम 5:30 बजे उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, शुभचिंतक एवं क्षेत्रीय लोगों के शामिल होने की संभावना है।
