मौनी अमावस्या 2026: स्नान, दान और मौन का महापर्व, जानिए धार्मिक, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। यह दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। देशभर में इस अवसर पर करोड़ों श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। विशेषकर प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक जैसे तीर्थ स्थलों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है।
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6:14 AM, Jan 18, 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। यह दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। देशभर में इस अवसर पर करोड़ों श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। विशेषकर प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक जैसे तीर्थ स्थलों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है।
मौनी अमावस्या क्यों है विशेष
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन देवताओं द्वारा अमृत कलश से गिरी अमृत की बूंदें पवित्र नदियों में समाहित हुई थीं। इसी कारण इस दिन नदियों का जल अमृत के समान पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त करता है और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।
प्रमुख तीर्थों में विशेष स्नान पर्व
प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर स्नान का विशेष महत्व
हरिद्वार में गंगा स्नान से अक्षय पुण्य
उज्जैन में क्षिप्रा नदी में स्नान का विशेष फल
नासिक में गोदावरी नदी में स्नान से सभी दोषों का नाश
इन तीर्थों पर साधु-संत, अखाड़े और कल्पवासी विशेष अनुष्ठान करते हैं।
मनु और शतरूपा की उत्पत्ति की मान्यता
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इसी तिथि को ब्रह्मा जी ने सृष्टि के प्रथम पुरुष मनु और प्रथम स्त्री शतरूपा की रचना की थी। इसी कारण इस दिन को मानवादि तिथि भी कहा जाता है। यह दिन मानव सभ्यता की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ है।
