शहीद स्मारक 'भारत छोड़ो आंदोलन' के वीर सपूतों की शौर्य गाथा करते हैं बयां
जिले में स्थित धानापुर और सैयदराजा शहीद स्मारक सन 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान अमर बलिदान देने वाले वीर सपूतों की शौर्यगाथा बयां करते हैं। यहाँ के जांबाजों ने आजादी से पांच साल पहले ही थानों पर तिरंगा फहराकर अंग्रेजों को खदेड़ दिया था।धानापुर कांड और शहीद स्मारक (16 अगस्त 1942)महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान पर 16 अगस्त 1942 को कामता प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में हज़ारों क्रांतिक
चंदौली

7:55 PM, Aug 12, 2026
चंदौली। जिले में स्थित धानापुर और सैयदराजा शहीद स्मारक सन 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान अमर बलिदान देने वाले वीर सपूतों की शौर्यगाथा बयां करते हैं। यहाँ के जांबाजों ने आजादी से पांच साल पहले ही थानों पर तिरंगा फहराकर अंग्रेजों को खदेड़ दिया था।धानापुर कांड और शहीद स्मारक (16 अगस्त 1942)महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान पर 16 अगस्त 1942 को कामता प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में हज़ारों क्रांतिकारियों ने धानापुर थाने पर धावा बोला।अंग्रेजी पुलिस की गोलीबारी में हीरा सिंह, महंगू सिंह और रघुनाथ सिंह मौके पर शहीद हो गए।ब्रिटिश हुकूमत ने सूर्यमनी सिंह, देवसागर सिंह और हरिनारायण अग्रहरि को फांसी की सजा दी तथा 17 अन्य को आजीवन कारावास दिया।शहीदों की पावन स्मृति में धानापुर में शहीद स्मारक का निर्माण किया गया है, जहाँ हर साल 16 अगस्त को क्रांति दिवस मनाया जाता है।सैयदराजा गोलीकांड और स्मारक 28 अगस्त 1942 को सैयदराजा थाने, पोस्ट ऑफिस और रेलवे स्टेशन पर तिरंगा फहराने के लिए स्थानीय लोग आगे आए।इस संघर्ष में शिवधर राम, फेकू राम और गणेश राम अंग्रेजों की गोलियों का शिकार होकर शहीद हुए।इन वीरों के अदम्य साहस और बलिदान की याद में सैयदराजा में शहीद स्मारक स्थापित किया गया है, जो आज भी नई पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देता है।
धानापुर में पुराना थाना भवन का फाइल फोटो
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आजादी के पांच वर्ष पहले वर्ष 1942 में ही जिले में सैयदराजा थाने और धानापुर थाने पर आजादी के मतवालों ने तिरंगा फहरा दिया था। धानापुर में 16 अगस्त को और सैयदराजा थाने पर 28 अगस्त को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने तिरंगा फहरा कर आजादी की घोषणा कर दी थी। इस प्रयास में कई लोगों ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। स्वतंत्रता संग्राम स्मृति स्थल आज भी शहीदों की अमर गाथा सुना रही है।
महात्मा गांधी ने नौ अगस्त 1942 को जब करो या मरो का सिंहनाद किया था तो उसकी गूंज धानापुर और सैयदराजा की धरती पर पहुंच गई। धानापुर में क्रांतिकारियों ने 16 अगस्त 1942 को तो सैयदराजा में 28 अगस्त 1942 को जान की बाजी लगाकर थाने पर तिरंगा फहरा दिया। इस प्रयास में 16 अगस्त को धानापुर में हीरा सिंह,महंगू सिंह और रघुनाथ सिंह तो सैयदराजा में 28 अगस्त को श्रीधर, फेकू राय,और गणेश सिंह शहीद हो गए थे।दोनों जगहों में दर्जनों क्रांतिकारी घायल भी हुए थे। धानापुर व सैयदराजा कांड की गूंज ब्रिटेन की संसद में भी गूंजा था और प्रधानमंत्री चर्चिल को बयान देने को मजबूर कर दिया था। सैयदराजा और धानापुर में शहीद स्मारक की स्थापना की गई है।
