भगवान शिव से सीखें आदर्श गृहस्थ जीवन, ध्रुव तारा दर्शन का बताया महत्व-अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज
मसोई गांव में नौ दिवसीय रामकथा के प्रथम दिवस पर कथावाचक परमपूज्य श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आदर्श गृहस्थ जीवन, पारिवारिक संबंधों और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर विस्तृत संदेश दिया। महाराज जी ने कहा कि मनुष्य जब दुराचार, पापाचार, व्यभिचार और भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाता है, तब उसका जीवन नरकीय हो जाता है और वह बार-बार दुखों से घिरा रहता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में श्रीमद्
शहाबगंज, चंदौली

6:31 PM, Apr 25, 2026
विनोद कुमार
जनपद न्यूज़ टाइम्सशहाबगंज। मसोई गांव में नौ दिवसीय रामकथा के प्रथम दिवस पर कथावाचक परमपूज्य श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आदर्श गृहस्थ जीवन, पारिवारिक संबंधों और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर विस्तृत संदेश दिया। महाराज जी ने कहा कि मनुष्य जब दुराचार, पापाचार, व्यभिचार और भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाता है, तब उसका जीवन नरकीय हो जाता है और वह बार-बार दुखों से घिरा रहता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में श्रीमद्भागवत, श्रीरामचरितमानस, राम-नाम और सत्संग ही जीवन को परमात्मा से जोड़ने का सबसे सरल मार्ग है।
अपने प्रवचन में महाराज जी ने कहा कि “गृहस्थ जीवन कैसा होना चाहिए, यह भगवान शिव से सीखना चाहिए।” उन्होंने पति-पत्नी के मधुर संबंध, आपसी संवाद, संयम और सम्मान को परिवार की नींव बताया। साथ ही कहा कि परिवार में माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री और भाई-बहन यदि एक-दूसरे की बात समझें, तो समाज में भी सौहार्द बना रहता है। उन्होंने तनाव बढ़ाने के बजाय समस्याओं का शांत मन से समाधान खोजने पर जोर दिया।
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महाराज जी ने मानव जीवन को चार पड़ावों में विभाजित बताते हुए कहा कि हर अवस्था का सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संन्यास का अर्थ परिवार छोड़ना नहीं, बल्कि अपने घर को ही वैकुंठ के समान बनाना है। भगवान के नाम का स्मरण, कीर्तन और सेवा ही जीवन का वास्तविक आधार है। उन्होंने जन्मदिन के अवसर पर ध्रुव तारा के दर्शन को शुभ बताते हुए कहा कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
