टैक्स टेररिज्म से टैक्स ट्रस्ट की ओर: बजट-2026 का सबसे बड़ा संदेश
भारत का टैक्स सिस्टम अब डराने वाला नहीं, बल्कि भरोसे का जरिया बनने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। यह मांग कोई नई नहीं थी, लेकिन वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में असमंजस और अविश्वास के माहौल के बीच मोदी सरकार ने टैक्सपेयर्स का विश्वास जीतने का बड़ा दांव खेला है।

6:26 AM, Feb 2, 2026
बजट
जनपद न्यूज़ टाइम्सभारत का टैक्स सिस्टम अब डराने वाला नहीं, बल्कि भरोसे का जरिया बनने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। यह मांग कोई नई नहीं थी, लेकिन वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में असमंजस और अविश्वास के माहौल के बीच मोदी सरकार ने टैक्सपेयर्स का विश्वास जीतने का बड़ा दांव खेला है।
जन-विश्वास 2.0 को जमीन पर उतारते हुए सरकार ने साफ संदेश दिया है—हर करदाता अपराधी नहीं होता और हर तकनीकी चूक टैक्स चोरी नहीं होती।
टैक्स टेररिज्म पर सीधा प्रहार
दशकों से यह विडंबना रही है कि टीडीएस जमा करने में मामूली देरी या कागजी दस्तावेजों की छोटी-सी गलती भी कारोबारियों को नोटिस, कचहरी और यहां तक कि जेल तक ले जाती थी।
बजट-2026 इसी दमनकारी मानसिकता को बदलने की कोशिश करता है। नीति आयोग की सिफारिशों को अमल में लाते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनजाने में हुई गलतियों को अब आपराधिक कृत्य नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में केवल नागरिक दंड लगाया जाएगा, न कि आपराधिक कार्रवाई।
भारी पड़ रही मुकदमेबाजी
सरकार की यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि टैक्स विवादों में देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा फंसा हुआ है।
करीब 16.75 लाख करोड़ रुपये की राशि अलग-अलग टैक्स मामलों में अटकी है—वह पूंजी जो उद्योगों, स्टार्टअप्स और रोजगार सृजन की धड़कन बन सकती थी।
आंकड़े बताते हैं कि:
आयकर अपील के 5.4 लाख से अधिक मामले ट्रिब्यूनलों में लंबित हैं
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 40 हजार से ज्यादा मामले अभी फैसले का इंतजार कर रहे हैं
