सात साल से जलभराव की चपेट में चार बीघा धान की फसल, कर्ज में डूबा किसान परिवार
शहाबगंज। बड़ौरा गांव में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने का खामियाजा एक किसान परिवार पिछले सात वर्षों से भुगत रहा है। हर साल बारिश के मौसम में खेतों में पानी भर जाने से स्वर्गीय गिरधारी गुप्ता की करीब चार बीघा धान की फसल बर्बाद हो जाती है। खेती से लगातार नुकसान के चलते परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ता गया।
शहाबगंज, चंदौली

6:38 PM, Aug 8, 2026
विनोद कुमार
जनपद न्यूज़ टाइम्सशहाबगंज। बड़ौरा गांव में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने का खामियाजा एक किसान परिवार पिछले सात वर्षों से भुगत रहा है। हर साल बारिश के मौसम में खेतों में पानी भर जाने से स्वर्गीय गिरधारी गुप्ता की करीब चार बीघा धान की फसल बर्बाद हो जाती है। खेती से लगातार नुकसान के चलते परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ता गया। आर्थिक तंगी और कर्ज के बीच गिरधारी गुप्ता की इलाज के दौरान मौत हो गई। अब परिवार समस्या के स्थायी समाधान के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
गिरधारी गुप्ता के भाई कन्हैया गुप्ता ने बताया कि खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण पिछले सात वर्षों से धान की फसल प्रभावित हो रही है। हर साल फसल बर्बाद होने के बावजूद बीज, खाद, जुताई और अन्य कृषि कार्यों पर खर्च होता रहा। वहीं, केसीसी का कर्ज भी चुकाना पड़ता रहा। आमदनी नहीं होने से कर्ज बढ़ता गया और परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई।
कन्हैया गुप्ता के मुताबिक आर्थिक संकट इतना बढ़ गया कि कर्ज चुकाने के लिए परिवार को अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि जलजमाव को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई और खेतों से पानी निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की गई, लेकिन हर बार आश्वासन के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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बारिश शुरू होते ही एक बार फिर खेतों में पानी भरने का खतरा मंडराने लगा है। जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से किसान परिवार के सामने इस वर्ष भी फसल बर्बाद होने की आशंका बनी हुई है।
कन्हैया गुप्ता ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए खेतों से पानी निकासी के लिए स्थायी नाला या अन्य प्रभावी व्यवस्था कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने वर्षों से फसल नुकसान झेल रहे परिवार को उचित राहत और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो परिवार के सामने आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
