रामकथा के तीसरे दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, राजन महाराज ने सुनाया शिव-पार्वती
कथा के दौरान राजन महाराज ने शिव-पार्वती संवाद का वर्णन करते हुए बताया कि माता पार्वती के मन में भगवान श्रीराम के वास्तविक स्वरूप और उनकी दिव्यता को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई। उन्होंने भगवान शिव से श्रीराम के रहस्य के बारे में प्रश्न किया। इस पर भगवान शिव ने श्रीराम की महिमा और उनके परम दिव्य स्वरूप का वर्णन किया।
चंदौली

4:52 PM, Oct 22, 2026
पश्चिम बंगाल सरकार के कैबिनेट मन्त्री अर्जुन सिंह, जौनपुर पूर्व सांसद धनंजय सिंह, अर्जुन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री जामा खान और विधायक रमेश जायसवाल समेत कई गणमान्य लोगों ने कथा में की सहभागिता
धानापुर, चंदौली। धानापुर स्थित दशमी पोखरा पर उदयनाथ सिंह फाउंडेशन की ओर से आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास राजन महाराज जी ने भगवान शिव और माता पार्वती के संवाद का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप और उनकी महिमा पर प्रकाश डाला। भजन-कीर्तन और श्रीराम के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा। इस दौरान सांसद, मंत्री, विधायक समेत कई गणमान्य लोगों ने कथा में सहभागिता की।
माता पार्वती की जिज्ञासा पर भगवान शिव ने बताया श्रीराम का महात्म्य
कथा के दौरान राजन महाराज ने शिव-पार्वती संवाद का वर्णन करते हुए बताया कि माता पार्वती के मन में भगवान श्रीराम के वास्तविक स्वरूप और उनकी दिव्यता को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई। उन्होंने भगवान शिव से श्रीराम के रहस्य के बारे में प्रश्न किया। इस पर भगवान शिव ने श्रीराम की महिमा और उनके परम दिव्य स्वरूप का वर्णन किया।
राजन महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन आदर्श, मर्यादा, त्याग, प्रेम और धर्म का प्रतीक है। उनके चरित्र से मनुष्य को सत्य के मार्ग पर चलने, कर्तव्यों का पालन करने और समाज में प्रेम व सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर प्रसंग का श्रवण करते रहे।
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शरीर बूढ़ा हो सकता है, मन को कभी बूढ़ा नहीं होने देना चाहिए
राजन महाराज ने जीवन में सकारात्मक सोच और उत्साह बनाए रखने का संदेश देते हुए कहा कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर बूढ़ा हो सकता है, लेकिन मन को कभी बूढ़ा नहीं होने देना चाहिए। मनुष्य के भीतर हमेशा उत्साह, उमंग, ऊर्जा और कुछ नया करने की इच्छा बनी रहनी चाहिए। सकारात्मक सोच व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, मनुष्य को आत्मविश्वास, धैर्य और संयम बनाए रखना चाहिए। धार्मिक कथाओं की सार्थकता तभी है, जब उनसे मिलने वाली शिक्षा को अपने आचरण और व्यवहार में उतारा जाए।
पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश
कथा के तीसरे दिन राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वृक्षबंधु डॉ. परशुराम भी उपस्थित रहे। भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग और प्रकृति से उनके जुड़ाव के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण तथा वृक्षारोपण के महत्व पर चर्चा हुई। लोगों को पेड़-पौधों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी गई। साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित वातावरण तैयार करने को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने पर बल दिया गया।
सांसद, मंत्री और विधायक समेत कई गणमान्य लोगों ने की सहभागिता
श्रीराम कथा के तीसरे दिन धनंजय सिंह, अर्जुन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री जामा खान, विधायक रमेश जायसवाल, डॉ. आनंद तिवारी, पूर्व विधायक तथा राज्यसभा सांसद साधना सिंह समेत कई गणमान्य लोग पहुंचे। उनके आगमन से आयोजन स्थल पर विशेष उत्साह देखने को मिला।
