मसूर की उन्नत प्रजाति से किसानों को मिला बेहतर उत्पादन, वैज्ञानिकों ने किया खेतों का निरीक्षण
धानापुर। सरकार द्वारा दलहन व तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के क्रम में क्षेत्र के किसानों के हित में कार्य कर रही संस्था शिवानन्दम फॉर्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी खड़ान के तत्वावधान में किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी तथा भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के सहयोग से एफपीओ से जुड़े दिया, पसहटा व बुद्धपुर गांव
चंदौली

4:47 PM, Mar 16, 2026
धानापुर। सरकार द्वारा दलहन व तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के क्रम में क्षेत्र के किसानों के हित में कार्य कर रही संस्था शिवानन्दम फॉर्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी खड़ान के तत्वावधान में किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी तथा भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के सहयोग से एफपीओ से जुड़े दिया, पसहटा व बुद्धपुर गांव के 24 किसानों को उन्नत व रोग प्रतिरोधी मसूर की प्रजाति आईपीएल-225 का बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया गया था। वैज्ञानिकों की देखरेख में किसानों ने इसकी खेती की।
इसी क्रम में सोमवार को प्रोफेसर मनोज कुमार सिंह और प्रोफेसर अनिल कुमार सिंह (शस्य विकास संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी) दो पीएचडी स्कॉलर्स के साथ गांवों में पहुंचकर किसानों के खेतों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान ग्राम बुद्धपुर के किसान राजनाथ उपाध्याय के खेत में उगाई गई मसूर की फसल की थ्रेसर से मड़ाई कराई गई, जिसमें एक एकड़ में 10 कुंतल से अधिक उत्पादन प्राप्त हुआ। इस परिणाम को देखकर किसानों और वैज्ञानिकों में उत्साह देखने को मिला।
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वैज्ञानिकों ने किसानों को आश्वासन दिया कि मसूर की इस उन्नत प्रजाति के विस्तार के लिए आगे भी हर संभव सहयोग दिया जाएगा। साथ ही किसानों को निःशुल्क बीज और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने की बात भी कही गई। उन्होंने फसलों में उगने वाले खरपतवार के नियंत्रण के तरीकों की भी विस्तृत जानकारी दी। किसानों ने खेती से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका वैज्ञानिकों ने समाधान किया।
कार्यक्रम के अंत में एफपीओ के निदेशक रमेश सिंह और ओमप्रकाश सिंह ने किसानों से अपील की कि यदि वे कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता करेंगे तो खेती में निश्चित रूप से बदलाव आएगा, जिससे लागत कम और आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने जीरो टिलेज तकनीक और धान की सीधी बुआई को अपनाने पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर राजवंश सिंह, नगीना यादव, बासुदेव सिंह, सरवन कुमार बिंद, राजनाथ उपाध्याय, विवेक सिंह, कृष्णानंद सिंह, राघवेंद्र तिवारी सहित क्षेत्र के कई किसान उपस्थित रहे। अंत में निदेशक रमेश सिंह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
