मौलिक अधिकारों से ही मजबूत होता है लोकतंत्र, बाबा साहब के योगदान पर हुई चर्चा
शहाबगंज, चंदौली। क्षेत्र के सेमरा गांव स्थित बगीचे में बुधवार को संवैधानिक मौलिक अधिकारों के तहत विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें भारतीय संविधान के निर्माण में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान और संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है।
शहाबगंज, चंदौली

3:11 PM, Oct 28, 2026
विनोद कुमार
जनपद न्यूज़ टाइम्ससेमरा गांव में आयोजित विचार गोष्ठी में संविधान के महत्व पर वक्ताओं ने रखे विचार
शहाबगंज, चंदौली। क्षेत्र के सेमरा गांव स्थित बगीचे में बुधवार को संवैधानिक मौलिक अधिकारों के तहत विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें भारतीय संविधान के निर्माण में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान और संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेंद्र राव ने कहा कि आजादी से पहले समाज के पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों को अनेक सामाजिक असमानताओं का सामना करना पड़ता था। शिक्षा, सामाजिक सम्मान और समान अवसरों से बड़ी संख्या में लोग वंचित थे। ऐसे समय में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर देश के नागरिकों को समान अधिकार दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक योगदान दिया।
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उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को जाति, धर्म, लिंग और आर्थिक स्थिति के भेदभाव से ऊपर उठकर समानता का अधिकार प्रदान करता है। स्त्री हो या पुरुष, गरीब हो या अमीर, सभी को कानून की नजर में समान माना गया है। शिक्षा प्राप्त करने, अपनी बात रखने, स्वतंत्र रूप से आने-जाने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकारों का महत्व समझना जरूरी है।
मुख्य अतिथि ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण शक्तियों में से एक है। इसके माध्यम से प्रत्येक पात्र नागरिक अपनी पसंद के प्रतिनिधि का चुनाव कर सकता है। इसलिए लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए।
गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और बंधुत्व का आधार है। बाबा साहब के विचारों को अपनाकर ही समाज में भेदभाव समाप्त किया जा सकता है और एक समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया।
