मानसून सत्र में आरटीई एक्ट में संशोधन कर सेवारत शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग, चंदौली में सौंपा गया ज्ञापन
जिलाध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि कक्षा आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों पर टीईटी लागू करने संबंधी 23 अगस्त 2010 की एनसीटीई अधिसूचना और उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना नैसर्गिक न्याय और तत्कालीन सेवा शर्तों का खुला उल्लंघन है।
चंदौली

3:47 PM, Jun 18, 2026
चंदौली। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में गुरुवार को देशभर के जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में चंदौली में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष अजय सिंह के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।
जिलाध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि कक्षा आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों पर टीईटी लागू करने संबंधी 23 अगस्त 2010 की एनसीटीई अधिसूचना और उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना नैसर्गिक न्याय और तत्कालीन सेवा शर्तों का खुला उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि नियुक्ति के समय जिन नियमों और पात्रताओं के आधार पर शिक्षकों ने नौकरी प्राप्त की, वर्षों बाद उन्हीं शिक्षकों को अयोग्य बताकर दो वर्षों के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करने का निर्देश देना न्यायोचित नहीं है। साथ ही टीईटी पास न करने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति की चेतावनी भी दी जा रही है, जो लाखों शिक्षकों के सम्मान और सेवा सुरक्षा के खिलाफ है।
अजय सिंह ने कहा, "खेल के बीच खेल के नियम नहीं बदले जाते।" उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी अन्य विभाग में कर्मचारियों की नियुक्ति के 20 वर्ष बाद नई योग्यता लागू कर उनकी नौकरी पर संकट खड़ा किया गया है।
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महासंघ ने मांग की कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम में आगामी मानसून सत्र के दौरान आवश्यक संशोधन कर टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को इससे स्थायी छूट प्रदान की जाए। संगठन का कहना है कि देशभर में 20 लाख से अधिक शिक्षक इस मुद्दे से प्रभावित हैं और उनकी लंबी शिक्षण सेवाओं तथा अनुभव का सम्मान किया जाना चाहिए।
जिलाध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने शिक्षकों के मान-सम्मान और सेवा सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा तो संगठन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
इस अवसर पर फैयाज अहमद, आदित्य सिंह रघुवंशी, वीरेंद्र सिंह यादव, अखिलेश श्रीवास्तव, अमरेंद्र पांडेय, नूर अख्तर अली, मनोज गुप्ता, अवधेश, कालिंदी पांडेय सहित दर्जनों शिक्षक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
