सुरतापुर पावर हाउस की मनमानी से उपभोक्ता परेशान, रोज दो घंटे की कटौती पर फूटा गुस्सा
भीषण गर्मी के बीच सुरतापुर पावर हाउस से जुड़े दर्जनों गांवों के उपभोक्ता बिजली विभाग की कार्यप्रणाली से नाराज हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक सप्ताह से प्रतिदिन दोपहर करीब 1 बजे "मेंटेनेंस" और "फॉल्ट" के नाम पर बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति बाधित कर दी जाती है, जिससे लोगों को लगभग दो घंटे तक गर्मी और उमस का सामना करना पड़ रहा है।
चहनिया, चंदौली

4:23 PM, Jun 9, 2026
सुधींद्र पाण्डेय
जनपद न्यूज़ टाइम्सचहनियाँ। भीषण गर्मी के बीच सुरतापुर पावर हाउस से जुड़े दर्जनों गांवों के उपभोक्ता बिजली विभाग की कार्यप्रणाली से नाराज हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक सप्ताह से प्रतिदिन दोपहर करीब 1 बजे "मेंटेनेंस" और "फॉल्ट" के नाम पर बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति बाधित कर दी जाती है, जिससे लोगों को लगभग दो घंटे तक गर्मी और उमस का सामना करना पड़ रहा है।
रामगढ़, बैराठ, नादी, दरियापुर, सराय रसूलपुर समेत आसपास के गांवों के उपभोक्ताओं का कहना है कि जब पहले से निर्धारित रोस्टर के अनुसार बिजली कटौती लागू है, तब रोजाना एक ही समय पर अतिरिक्त शटडाउन लेने का औचित्य समझ से परे है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अब आकस्मिक नहीं बल्कि नियमित प्रक्रिया बन चुकी है, जिससे विभागीय दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार दोपहर का समय सबसे अधिक गर्मी वाला होता है। ऐसे में अचानक बिजली आपूर्ति ठप होने से बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बिजली कटौती के कारण पेयजल आपूर्ति, पंखे, कूलर और अन्य आवश्यक उपकरण भी प्रभावित हो रहे हैं।
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उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि बिना सूचना के प्रतिदिन लिया जाने वाला यह शटडाउन बंद नहीं किया गया और बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वे मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के साथ ही संबंधित अधिकारियों को अवगत कराकर सुरतापुर पावर हाउस का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि वास्तव में मेंटेनेंस कार्य चल रहा है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। वहीं, यदि प्रतिदिन एक ही समय पर फॉल्ट की समस्या सामने आ रही है तो विभाग अब तक उसका स्थायी समाधान क्यों नहीं खोज पाया है।
भीषण गर्मी में बिजली संकट से जूझ रहे उपभोक्ताओं की नजर अब विभागीय अधिकारियों पर टिकी है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं या फिर उपभोक्ताओं का आक्रोश आंदोलन का रूप लेता है।
