विंध्य एक्सप्रेस-वे आंदोलन से पहले किसान नेता शतीष चौहान ने लगाए नजरबंदी के आरोप, सरकार पर साधा निशाना
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के किसान नेता शतीष चौहान ने आरोप लगाया है कि विंध्य एक्सप्रेस-वे के विरोध में प्रस्तावित किसान आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने उन्हें 4 अगस्त से उनके आवास पर नजरबंद कर रखा है। उनका दावा है कि उनके घर पर 24 घंटे पुलिस बल तैनात है, जिसके कारण वे किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को लेकर सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं
शहाबगंज, चंदौली

4:47 PM, Aug 7, 2026
विनोद कुमार
जनपद न्यूज़ टाइम्सचंदौली। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के किसान नेता शतीष चौहान ने आरोप लगाया है कि विंध्य एक्सप्रेस-वे के विरोध में प्रस्तावित किसान आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने उन्हें 4 अगस्त से उनके आवास पर नजरबंद कर रखा है। उनका दावा है कि उनके घर पर 24 घंटे पुलिस बल तैनात है, जिसके कारण वे किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को लेकर सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं।
टेलीफोन पर बातचीत में शतीष चौहान ने सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसानों और युवाओं को अब अपनी समस्याएं खुलकर रखने की भी स्वतंत्रता नहीं रह गई है। उनके अनुसार भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना से प्रभावित किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रही है और किसान अपनी मांगों का न्यायसंगत समाधान चाहते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक जिला प्रशासन और यूपीडा (UPEDA) का कोई सक्षम अधिकारी प्रभावित किसानों की समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं कर सका है। शतीष चौहान का दावा है कि परियोजना से प्रभावित 58 गांवों के किसान 10 अगस्त को जिला प्रशासन के खिलाफ विशाल धरना-प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसी आंदोलन को विफल करने के लिए किसान नेताओं को घरों में नजरबंद किया जा रहा है।
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किसान नेता ने कहा कि यदि किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करने से भी रोका जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धान के कटोरे के रूप में पहचान रखने वाला चंदौली अब एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के कारण अपनी पहचान बदलता जा रहा है। उनके अनुसार किसान अपनी भूमि को मां मानते हैं और देश के लिए अन्न उत्पादन करते हैं, लेकिन सरकार किसानों की पीड़ा समझने के बजाय पूंजीपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।
प्रशासन का पक्ष: इस संबंध में जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सकी है। प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
