उहापोह और असमंजस के बाद हकीकत में बदला तोड़ने का कार्य
जनपद की एकमात्र शहर अब बदलाव के अपने पड़ाव की ओर चल दी है। जीटी रोड के किनारे की आबोहवा बदल चुकी है। उहापोह और असमंजस के बाद अतिक्रमण हटाओ अभियान फाइलों से निकल कर हकीकत में तब्दील हो गया। सड़क चौड़ीकरण परियोजना से पहले भी कई बार दुकानों के आगे निशान लगते रहे।कई बार नोटिस भी जारी हुआ।चर्चाओं का बाजार हमेशा गर्म रहा कि स्टेशन के सामने की दुकानें टूटेगी और स्टेशन बाहर से दिखेगा।
चंदौली

7:49 PM, May 4, 2026
नापी ,निशान और नोटिस के बाद भी भ्रम रहे लोग
डीडीयू नगर। जनपद की एकमात्र शहर अब बदलाव के अपने पड़ाव की ओर चल दी है। जीटी रोड के किनारे की आबोहवा बदल चुकी है। उहापोह और असमंजस के बाद अतिक्रमण हटाओ अभियान फाइलों से निकल कर हकीकत में तब्दील हो गया। सड़क चौड़ीकरण परियोजना से पहले भी कई बार दुकानों के आगे निशान लगते रहे।कई बार नोटिस भी जारी हुआ।चर्चाओं का बाजार हमेशा गर्म रहा कि स्टेशन के सामने की दुकानें टूटेगी और स्टेशन बाहर से दिखेगा। लेकिन यह एक फसाना था और एक जमाने से चला आ रहा था। निर्माण कार्य होता रहा। मस्जिद का विस्तार हुआ स्कूल का विस्तार हुआ।कई कार्यालय खुले लेकिन किसी का मानक तय नहीं था। सड़क चौड़ीकरण परियोजना आने के बाद एक बार फिर नापी,निशान और नोटिस की कार्रवाई की गई।सड़क बनने लगी।इसमें उहापोह का दौर चलता रहा। फोर लेन और सिक्स लेन के असमंजस में रहे। सुभाष पार्क से जी टी आर ब्रिज तक फोर लेन हुआ तो लोगों की भ्रम फिर जगी अब नहीं टूटेगा। लेकिन 30 अप्रैल का ऐतिहासिक दिन आया जब प्रशासन ने असमंजस और ऊहापोह पर बुलडोजर चला दिया।चेतावनी के बाद लोग खुद अपना दुकान और मकान तेजी से तोड़ रहा है। भ्रम अब भी बरकरार हैं 46 तोड़ना है कि 52 तोड़ना है। वहीं प्रशासन ने आगाह किया है जितना नापी में निशान में अंकित किया गया है उतना तोड़ना है।
मुगलसराय का जीटी रोड के किनारे के दोनों पटरी की दुकान और मकान का कुछ हिस्सा सड़क चौड़ीकरण के लिए ध्वस्तीकरण का केंद्र बन गई है।सड़क चौड़ीकरण के लिए बाधक बन रहे इन आशियानों को प्रशासन के कड़े रुख के बाद तोड़ना पड़ रहा है। शाहर का सबसे बड़ा मार्केट पर बुलडोजर चल गया है।सड़क चौड़ीकरण अभियान के दौरान व्यापारियों में ऊहापोह की स्थिति है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि नापी के बाद लगे निशान तक अतिक्रमण हटाया जाएगा ।
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जबकि लोग म 46 फीट फिर 52 फीट फिर 48 फीट तक के ऊहापोह में फंसे है। इसके बावजूद अधिकांश व्यापारी खुद ही 52 से 55 फीट तक अपने दुकान और मकान ढहा रहे हैं।
व्यापारियों में उहापोह की स्थिति बन गई है। उन्हें आशंका है कि यदि अभी कम हिस्सा तोड़ा गया तब भविष्य में फिर से चौड़ीकरण के नाम पर दोबारा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी डर के चलते व्यापारी स्वेच्छा से अधिक हिस्से तक ध्वस्तीकरण कर रहे हैं। जिससे भविष्य में तोड़-फोड़ की स्थिति दोबारा नुकसान न उठाना पड़े। कितना तोड़ा जाना है यह असमंजस और ऊहापोह बरकरार है। लेकिन वर्षों से चली आ रही चर्चाओं पर इस अभियान से विराम लगा हुआ है।अभी भी चर्चा हैं कि क्या स्टेशन सड़क से दिखाई पड़ेगा ।
