मंदिर की 60 बीघा भूमि वापस, न्यायालय ने फर्जी वरासत की निरस्त; रामचंद्र व विष्णु मंदिर के नाम दर्ज करने का आदेश
दानकर्ता रामस्वरूप ने वर्ष 1945 में वक्फ डीड (दान पत्र) के माध्यम से अराजी संख्या 39, 25, 52, 62, 75 एवं 77 की भूमि मंदिर की स्थापना और संचालन के लिए दान की थी। दान पत्र में स्पष्ट उल्लेख था कि भूमि से होने वाली आय का उपयोग मंदिर में पूजा-पाठ, रखरखाव तथा अन्य धार्मिक कार्यों के लिए किया जाएगा। इसके संचालन के लिए एक समिति गठित करने की व्यवस्था भी निर्धारित की गई थी।
शहाबगंज, चंदौली

4:33 PM, Jun 20, 2026
विनोद कुमार
जनपद न्यूज़ टाइम्सशहाबगंज, चंदौली। क्षेत्र के कटवा माफी गांव स्थित रामचंद्र मंदिर एवं विष्णु मंदिर की लगभग 60 बीघा भूमि को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने फर्जी तरीके से दर्ज की गई वरासत को निरस्त करते हुए भूमि को पुनः मंदिर के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव निवासी दानकर्ता रामस्वरूप ने वर्ष 1945 में वक्फ डीड (दान पत्र) के माध्यम से अराजी संख्या 39, 25, 52, 62, 75 एवं 77 की भूमि मंदिर की स्थापना और संचालन के लिए दान की थी। दान पत्र में स्पष्ट उल्लेख था कि भूमि से होने वाली आय का उपयोग मंदिर में पूजा-पाठ, रखरखाव तथा अन्य धार्मिक कार्यों के लिए किया जाएगा। इसके संचालन के लिए एक समिति गठित करने की व्यवस्था भी निर्धारित की गई थी।
बताया जाता है कि समय बीतने के साथ दानकर्ता के कुछ परिजनों ने उक्त भूमि पर कथित रूप से फर्जी तरीके से अपना नाम वरासत में दर्ज करा लिया। मामले की जानकारी होने पर ग्राम प्रधान सुनीता देवी ने आपत्ति दर्ज कराते हुए न्यायालय की शरण ली।
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न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों, उपलब्ध अभिलेखों एवं साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुनाया। फैसले में शीला देवी समेत अन्य पक्षकारों की वरासत को निरस्त करते हुए संबंधित भूमि को मूल दानपत्र के अनुसार रामचंद्र मंदिर एवं विष्णु मंदिर के नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया।
न्यायालय के इस फैसले के बाद मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि इस निर्णय से मंदिर की संपत्ति सुरक्षित होगी तथा भूमि से प्राप्त होने वाली आय का उपयोग पुनः धार्मिक, सामाजिक एवं जनहित के कार्यों में किया जा सकेगा। लोगों ने इसे न्याय और धार्मिक संपत्ति की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला बताया है।
